माँ: ममता की वह शक्ति है जो हर लहर से लड़ जाती है

"माँ"…जिसकी डांट में भी प्रेम है,जिसकी मार में भी प्रेम है और जिसके प्रेम में भी प्रेम है। 
"माँ" केवल एक शब्द नहीं, बल्कि वह एहसास है जो जीवन को सुरक्षा, प्रेम और अपनापन देता है। संसार में यदि कोई रिश्ता निस्वार्थ प्रेम की सबसे सुंदर मिसाल है, तो वह माँ का रिश्ता है। वह अपने बच्चों के लिए हर दुख सह लेती है, हर संकट से लड़ जाती है और आवश्यकता पड़ने पर स्वयं को भी भुला देती है।
आज मदर्स डे के अवसर पर हालिया दृश्य भुलाए नहीं भूल रहा है।हम बात कर रहे हैं हाल ही में जबलपुर में सामने आए एक दृश्य की जिसने पूरे देश के हृदय को भावुक कर दिया था। पानी के बीच एक माँ अपने बच्चे को सीने से लगाए हुए दिखाई दी। उस दृश्य में डर भी था, संघर्ष भी था, लेकिन सबसे अधिक जो दिखाई दे रहा था, वह था — माँ का अटूट प्रेम।इस दृश्य ने एक बात और साबित कर दी "प्रेम" जीने के साथ साथ मरने की वजह भी बन जाता है। परन्तु माँ का प्रेम तो माँ का प्रेम ही है ,जिसकी कोई सानी नहीं।जिस प्रेम के लिए दुनिया इधर उधर भटती फिरती है वह निःस्वार्थ प्रेम तो सिर्फ ममता के आंचल में ही मिल सकता है। बाकी दुनियावी रिश्तों में कहीं न कहीं स्वार्थ निहित होता ही है।
सच कहूं तो जबलपुर के उस क्षण ने यह याद दिला दिया कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, माँ अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए हर सीमा पार कर जाती है।
माँ की ममता किसी शर्त की मोहताज नहीं होती।
बच्चा छोटा हो या बड़ा, सफल हो या असफल, माँ का स्नेह कभी कम नहीं होता। वह बच्चे के चेहरे की उदासी बिना शब्दों के पढ़ लेती है। उसकी दुआएँ जीवन के सबसे कठिन रास्तों को भी आसान बना देती हैं।
आज की भागदौड़ भरी दुनिया में हम अक्सर अपने कामों और जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि माँ के त्याग को सामान्य मान बैठते हैं। लेकिन सच तो यह है कि माँ का योगदान शब्दों में व्यक्त ही नहीं किया जा सकता।वह बच्चे को जन्म देते वक्त प्रसव पीड़ा का दर्द भी खुशी खुशी सह लेती है। जीवन भर वह अपने हिस्से की खुशियाँ छोड़कर परिवार के चेहरे पर मुस्कान सजाती है।
मदर्स डे पर माँ को उपहार देना ग़लत नहीं परन्तु यह केवल उपहार देने का दिन नहीं है। यह वह अवसर है जब हम अपनी माँ के प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करें। उन्हें यह महसूस कराएँ कि उनका त्याग अनमोल है और उनका अस्तित्व हमारे जीवन की सबसे बड़ी ताक़त है।
हमें यह भी समझना चाहिए कि माँ केवल जन्म देने वाली स्त्री ही नहीं होती। कई बार दादी, नानी, बहन या कोई ऐसी महिला भी माँ का रूप बन जाती है, जो अपने स्नेह और संरक्षण से हमारा जीवन सँवार देती है।वह भी माँ के समान ही आदरणीय हैं।
लेखन के अंतिम पड़ाव पर मैं उस माँ को सादर नमन करती हूॅं जिसने हमें यह महसूस कराया है कि माँ की ममता किसी परिस्थिति से हार नहीं मानती।वह जीवनपर्यंत अपने बच्चों को सुरक्षित रखना चाहती है।उसका हाथ थामे रखना चाहती है। जबलपुर के दृश्य को देखकर समझ आता है कि तूफ़ानी लहरें कितनी भी तेज क्यों न हों, माँ अपने बच्चे के लिए उम्मीद बनकर हमेशा खड़ी रहती है।उस माँ को शत् शत् नमन जिसने अपनी परवाह किए बिना अपने बच्चे का हाथ थामे रखा।
इस मदर्स डे पर हमारा फ़र्ज़ बनता है कि वक्त रहते हम संभल जाएं और अपनी अपनी माँ का तहेदिल से शुक्रिया अदा करें।आइए, हम अपनी माँ को केवल शब्दों से नहीं, बल्कि अपने व्यवहार, सम्मान और समय से यह एहसास दिलाएँ कि वे हमारे जीवन की सबसे अनमोल धरोहर हैं।
आज मेरी माँ भले ही इस दुनियां में नहीं हैं, परन्तु उसके प्रति सम्मान हमेशा मेरे दिल में यूंही बरकरार रहेगा। वह भी अपने जीवन काल में समय-समय पर मेरी ढाल बन खड़ी रहीं हैं।लव यू माँ......
वास्तव में माँ वह शक्ति है, जो हर तूफ़ान में भी अपने बच्चे के लिए किनारा बन जाती है।
— प्रवीन

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