प्रेम भाव है सागर से गहरा — प्रेम बिन कैसे जिया जाए?
जीवन एक रंगमंच खेल का और प्रेम है उसका आधार। यदि जीवन को एक यात्रा मानें, तो प्रेम उसका सबसे सुंदर पड़ाव कहा जाएगा । प्रेम केवल एक भावना नहीं, बल्कि वह शक्ति है जो मनुष्य को भीतर से बदल देती है।प्रेम की भावना हृदय की कठोरता को भी कोमलता में बदलने की क्षमता रखती है। यह सागर से भी गहरा है—असीम, अथाह और अनंत।अब प्रश्न यह उठता है कि जब प्रेम इतना महत्वपूर्ण है, तो क्या इसके बिना जीवन संभव है? और यदि संभव है, तो क्या वह जीवन वास्तव में पूर्ण कहलाएगा?प्रेम बिना जीवन का अस्तित्व है भी या नहीं?इस तथ्य को समझने के लिए हमें कुछ पहलुओं पर विचार करना होगा।यही विचार मंथन हमें इस सत्य के निकट पहुंचाएगा।सर्व प्रथम प्रेम को समझने का प्रयास करते हैं -
प्रेम का अर्थ क्या है?
यदि हम सामान्य तौर पर देखें तो प्रेम को अक्सर केवल रिश्तों तक सीमित कर दिया जाता है—माता-पिता, मित्र, जीवनसाथी या ईश्वर के प्रति भाव। परंतु प्रेम इससे कहीं अधिक व्यापक है।प्रेम है —
⚡किसी को गहराई से जानना
⚡किसी के दर्द को समझना
⚡बिना स्वार्थ के देना
किसी के लिए अपना अहं त्याग देना
प्रेम हमारे जीवन को खूबसूरत बताता है। जब प्रेम होता है, तो जीवन में मधुरता आती है। जैसे सूखे पेड़ पर हरियाली लौट आती है, वैसे ही प्रेम से मन में नई ऊर्जा जन्म लेती है। एक नवीन अहसास जन्म लेता है तो उससे पहले आपके जीवन से नदारत था।
प्रेम क्यों है सागर से भी गहरा?
सागर विशालता का सूचक है,जिसका ओर-छोर देखना सहज नहीं है। परन्तु सागर की गहराई को मापा जा सकता है, पर प्रेम की गहराई को नहीं।सागर सीमित है, पर प्रेम असीम है।सागर केवल बाहर दिखाई देता है, पर प्रेम भीतर महसूस होता है। सागर को स्पर्श कर उसकी उठती गिरती तरंगों को देखा जा सकता है। प्रेम भाव का सार है। उसे गहराई से अपने अंतर में जिया जा सकता है।बिना स्पर्श किए इसमें डूबा जा सकता है और जो एक बार इस प्रेम रुपी अथाह सागर में डूब जाता है।उसका जीवन बदलाव की ओर बढ़ जाता है।सच तो यह है कि
प्रेम का एक छोटा सा स्पर्श भी व्यक्ति के जीवन को बदल सकता है। यह मन के अंधकार को दूर कर, उसमें प्रकाश भर देता है।
प्रेम के बिना जीवन कैसा?
प्रेम जीवन को तरंगित करता है। प्रेम बिना जीवन नीरस बन जाता है। कल्पना कीजिए एक ऐसे जीवन की, जहाँ कोई अपनापन न हो, कोई समझने वाला न हो, कोई मुस्कान साझा करने वाला न हो। कोई सुख दुःख बांटने वाला न हो ऐसा जीवन केवल एक दिनचर्या बनकर रह जाता है—जीना तो होता है, पर महसूस कुछ नहीं होता। ऐसा नहीं है कि प्रेम के बिना कोई जी नहीं सकता।यदि सिर्फ सांसों का आवागमन ही जीवन है, तो प्रेम के बिना भी जिया जा सकता है। लेकिन मेरे लिए सिर्फ सांसों का आवागमन ही जीवन नहीं है। जीवन जिया जाए तब जीवन, जीवन है और जीने के लिए प्रेम ज़रूरी है।
प्रेम के बिना —
खुशी अधूरी लगती है
सफलता भी खाली महसूस होती है
मन में शांति नहीं टिकती
इसलिए कहा जाता है कि प्रेम के बिना जीवन केवल शरीर का अस्तित्व है, आत्मा का नहीं।
प्रेम कैसे जिएं?
प्रेम ख़रीदा नहीं जा सकता, प्रेम कमाया जाता है। प्रेम कमाने के लिए सबसे पहले तो स्वयं के भीतर प्रेम को पनपने का अवसर देना चाहिए। प्रेम को पाने से पहले उसे जीना जरूरी है।
अपनी मदद करें साथ ही दूसरों की मदद करें
क्षमा करना सीखें
छोटे-छोटे पलों में खुशी ढूंढें
ईश्वर या गुरु से आत्मिक संबंध बनाए रखें
जब हम प्रेम बांटते हैं, तभी वह कई गुना होकर हमारे पास लौटता है। ठीक वैसे ही जैसे फ़सल काटने के लिए पहले फ़सल उगाना जरूरी होता है। प्रेम ही प्रेम को फलिभूत करता है। प्रेम बांटिए और प्रेम पाइये।
निष्कर्ष
सच कहूं तो प्रेम ही है जो सुन्दर को सुन्दर बनाता है।
“प्रेम भाव है सागर से गहरा, प्रेम बिन कैसे जिया जाए” — यह केवल एक पंक्ति नहीं, बल्कि जीवन का सार है।प्रेम ही वह तत्व है जो जीवन को अर्थ देता है, उसे सुंदर बनाता है और हमें इंसान बनाता है। इंसान खुद को देवता बनाने का प्रयास न करे। इंसान , इंसान बन जाएं तो जीवन जीना भी आसान हो जाता है। इसलिए प्रेम को केवल शब्दों में नहीं, अपने व्यवहार में उतारें।क्योंकि जहाँ प्रेम है, वहीं सच्चा जीवन है।
अंतिम विचार: प्रेम को खोजने मत निकलो, उसे अपने भीतर जगाओ — वही सबसे सच्चा और गहरा सागर है।
"जिस जीवन में प्रेम नहीं, वह जीवन है बेकार।
प्रेम बसे जब अंतर में,तब समझो जीवन का सार।"
(प्रवीन)
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