बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों स्नेह की जीती-जागती मूरत 💞
इस मानवीय दुनिया में शायद ही कोई ऐसा हो जो दुखित न हो।हर प्राणी को कभी न कभी स्नेह के अभाव का अनुभव अवश्य हो जाता है । कुछ लोगों का तो लगभग पूरा जीवन ही किसी के स्नेह, प्यार व अपनेपन के अहसास के बिना ही बीत जाता है। परन्तु यह स्काथित तब आती है जब उन्हें प्रारम्भ से ही किसी का प्यार नहीं मिलता, किसी से अपनेपन का अहसास नहीं मिलता। ऐसे में वह सभी लोगों से दूरी बनाना प्राप्त कर देता है।जिसका परिणाम यह निकलता है कि न तो वह खुद किसी का बन पाता है और न ही कोई उसका बन पाता है। जबकि हमें अपने हृदय का एक कोना सदैव दूसरे के लिए खुला रखना चाहिए ताकि हम किसी को दिल से अपना मान सके और वह भी हमें अपना समझे।जब हम किसी दिशा में क़दम बढ़ाते हैं तो निश्चित ही हमें एक सलाहकार की एक मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।जो हमें सही दिशा दिखाएं और हमें आगे बढ़ने में मदद करें। जिससे लिए हमारे मार्गदर्शक दर्शक का सही होना भी परमावश्यक है। इसलिए जब भी हम सच्चे मार्गदर्शक की कल्पना करते हैं, तो मन में एक ऐसी छवि उभरती है जो केवल ज्ञान से ही नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और स्नेह से भी परिपूर्ण हो। ऐसे ही एक दिव...