माफ़ी: जिंदगी की उलझन या सुलझन
"माफ़ी" शब्द विचारों का मंथन करता है।इसका एक पहलू से आंकलन मुश्किल है।देखा जाए तो मनुष्य का जीवन रिश्तों, भावनाओं और अनुभवों का एक सुंदर मिश्रण है। इस सफर में कभी प्रेम मिलता है, तो कभी तकरार। कभी शब्द दिलों को जोड़ देते हैं, तो कभी वही शब्द दूरियाँ पैदा कर देते हैं। ऐसे में एक छोटा-सा शब्द —"Sorry" अर्थात् “माफ़ी” — कई बिगड़ी बातों को सँवारने की ताकत रखता है।पर इसी दृष्टिकोण को दूसरे नजरिए से देखें तो क्या माफ़ी सच में ज़िन्दगी सँवार देता है या उसे और उलझा देता है? परन्तु जब ऐसे विचार मन में गुलाटियां मारने लगे तब प्रश्न खड़ा होता है कि माफ़ी ज़िन्दगी की उलझन है या सुलझन? आएंगे इसके विभिन्न पक्षों पर दृष्टि डालें - माफ़ी: कमजोरी नहीं, समझदारी है अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि माफ़ी माँगना हार मान लेना है। उन्हें लगता है कि झुकने वाला व्यक्ति कमजोर होता है। जबकि सच इसके बिल्कुल विपरीत है। माफ़ी वही व्यक्ति माँग सकता है, जिसमें अपने अहंकार से ऊपर उठने का साहस हो। अपनी गलती स्वीकार करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। कई बार रिश्ते इसलिए टूट जाते हैं क्योंकि...